Hindi/Urdu Poems
15 hours ago
कभी-कभी इंसान अकेला रहना नहीं चाहता...
बस उसे कोई ऐसा नहीं मिलता,
जिसके सामने वो अपना दिल खोल सके।
वो भी पहले बहुत कोशिश करती थी...
लोगों को समझने की,
रिश्तों को बचाने की,
सबका साथ निभाने की...
लेकिन धीरे-धीरे
उसे समझ आने लगा कि
हर किसी को अपना समझ लेना,
सबसे बड़ी गलती होती है।
अब वो पहले जैसी नहीं रही...
अब वो कम बोलती है,
कम उम्मीद रखती है,
और लोगों से ज़्यादा
खुद के साथ रहना पसंद करती है।
हाँ, कभी-कभी रातों में
अकेलापन बहुत सताता है...
मन करता है कोई हो
जो बस इतना पूछे—
"तुम सच में ठीक हो ना?"
लेकिन फिर वो खुद को संभाल लेती है...
क्योंकि अब उसे पता है—
हर बार कोई और उसे संभालने नहीं आएगा।
इसलिए उसने सीख लिया है
खुद से लड़ना...
खुद को समझना...
और टूटकर भी
खुद को फिर से समेट लेना।
क्योंकि आखिर में...
जब सब चले जाते हैं,
तो इंसान के पास
वो खुद ही रह जाता है।
#BidyaG
#review
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बस उसे कोई ऐसा नहीं मिलता,
जिसके सामने वो अपना दिल खोल सके।
वो भी पहले बहुत कोशिश करती थी...
लोगों को समझने की,
रिश्तों को बचाने की,
सबका साथ निभाने की...
लेकिन धीरे-धीरे
उसे समझ आने लगा कि
हर किसी को अपना समझ लेना,
सबसे बड़ी गलती होती है।
अब वो पहले जैसी नहीं रही...
अब वो कम बोलती है,
कम उम्मीद रखती है,
और लोगों से ज़्यादा
खुद के साथ रहना पसंद करती है।
हाँ, कभी-कभी रातों में
अकेलापन बहुत सताता है...
मन करता है कोई हो
जो बस इतना पूछे—
"तुम सच में ठीक हो ना?"
लेकिन फिर वो खुद को संभाल लेती है...
क्योंकि अब उसे पता है—
हर बार कोई और उसे संभालने नहीं आएगा।
इसलिए उसने सीख लिया है
खुद से लड़ना...
खुद को समझना...
और टूटकर भी
खुद को फिर से समेट लेना।
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